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कुली का कमाल स्‍टेशन के फ्री वाई फाई की मदद से पास की सिविल सर्विस की परीक्षा

कुली का कमाल स्‍टेशन के फ्री वाई फाई की मदद से पास की सिविल सर्विस की परीक्षा  सपने पूरे करने के लिए हौंसला चाहिए सुविधा नहीं इस सच को सुनाती है इस कुली की कहानी जो स्‍टेशन के फ्री वाईफाई की मदद से सिविल सेवा परीक्षा में पास हुआ। कुली से अधिकार बनने का सफर केरल में एर्नाकुलम स्टेशन पर कुली का काम करने वाले श्रीनाथ के. की कहानी कुछ अनोखी है, जिन्होंने रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध मुफ्त वाईफाई सुविधा के सहारे इंटरनेट के जरिये पढ़ाई की और केरल पब्लिक सर्विस कमीशन, केपीएससी की लिखित परीक्षा पास की। सबसे बड़ी बात ये है कि तैयारी के दौरान वह किताबों में नहीं डूबे रहे बल्‍कि अपना काम करते हुए स्मार्ट फोन और ईयरफोन के सहारे पढ़ाई करते रहे। अब अगर श्रीनाथ साक्षात्‍कार में सफल हो जाते हैं तो वह भूमि राजस्व विभाग के तहत विलेज फील्ड असिस्टेंट के पद पर नियुक्‍त्‍त हो जायेंगे। तीसरे प्रयास में मिली सफलता श्रीनाथ पिछले पांच वर्ष से कुली के रूप में काम कर रहे हैं और उनका सिविल परीक्षा के इम्‍तिहान में बैठने का ये तीसरा प्रयास था। उनका कहना है कि यह पहला मौका था, जब उन्‍होंने स्ट...

वीकेंड में घर पर ही लें गोलगप्पों का मजा, ऐसे बनाएं

वीकेंड में घर पर ही लें गोलगप्पों का मजा, ऐसे बनाएं वीकेंड पर बनाएं जायकेदार रेसिपी कितने लोगों के लिए :  6 सामग्री : हींग पानी के लिए: 2 टे.स्पून इमली, 1 टे.स्पून धनिया पाउडर, 1/4 टी.स्पून हींग, 1/4 टी.स्पून लाल मिर्च पाउडर, 1/4 टी.स्पून काला नमक, 1/2 टी.स्पून चाट मसाला, स्वादानुसार नमक। केवड़ा पानी के लिए: 1/4 कप चीनी, 1/2 टी.स्पून काला नमक, 1/2 टी.स्पून चाट मसाला, 1/2 नींबू का रस, 2-3 बूंद केवड़ा एसेन्स, 21/2 कप पानी। लिमका पुदीना पानी के लिए: 1 बोतल लिमका, 1 कप पुदीने की पत्तियों व 2-3 हरी मिर्चो का पेस्ट, 1/2 टी.स्पून काला नमक, 1/2 टी.स्पून चाट मसाला, 1/2 टी.स् विधि : हींग पानी: हींग पानी के लिए एक बड़े कटोरे में 2 कप पानी और सारी सामग्री मिला लें। 3-4 घंटे तक इसे रखा रहने दें। अब एक महीन कपड़े से छान लें और एक कप पानी और मिला लें। ठंडा कर सर्व करें। खजूर इमली पानी: खजूर और इमली धो लें। फिर इनके साथ गुड़, लाल मिर्च पाउडर, हींग, नमक और 4 कप पानी को 20-25 मिनट तक उबालें। अब इसे ठंडा करके छान लें। आप इस चटनी को एक महीने तक फ्रिज में और 6 ...

कैसे होती है मां महालक्ष्‍मी की उपासना

कैसे होती है मां महालक्ष्‍मी की उपासना शुक्रवार को देवी उपासना की जाती है। इसी क्रम आज जानते हैं माता के महालक्ष्‍मी रूप की पूजा के बारे में। मां लक्ष्‍मी का स्‍वरूप हैं माता महालक्ष्‍मी माता लक्ष्‍मी का ही एक रूप हैं। वैसे तो प्रत्‍येक शुक्रवार को देवी की पूजा की जाती है, परंतु माता के महालक्ष्‍मी स्‍वरूप की पूजा के लिए हिंदू धर्म में कुछ विशेष अवधि होती है। कहते हैं कि देवशयनी एकादशी के बाद जब भगवान व‍िष्‍णु चार माह के लिये विश्राम पर चले जाते हैं, तो इस दौरान माता लक्ष्मी ही पूरा संसार चलाती है। इसी अवधि में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से लेकर आश्विन कृष्ण अष्टमी तक वे धरती पर निवास करती हैं। इन 16 द‍िनों में माता महालक्ष्‍मी की पूजा होती है। पूजा का आरंभ में हल्‍दी से रंगे 16 गांठ का रक्षासूत्र को हाथ में बांधना होता है, और आख‍िरी द‍िन की पूजा के बाद इसे किसी नदी या सरोवर में व‍िसर्जित कर दिया जाता है। 16वें द‍िन इस पूजा का उद्यापन क‍िया जाता है।  ऐसे में करें महालक्ष्‍मी पूजा  मां महालक्ष्‍मी की पूजा के लिए पहले पवित्र म‍िट्टी की मूर्ति चौक पर स्‍थाप‍ित करें...

जानें शनि की अदभुद कथा जिसने उन्‍हें बनाया सर्वोच्‍च ग्रह

जानें शनि की अदभुद कथा जिसने उन्‍हें बनाया सर्वोच्‍च ग्रह शनि की शक्‍ति से कौन परिचित नहीं है पर सर्वप्रथम इसका अहसास कैसे हुआ इसी के बारे में बताती है ये अनोखी शनि कथा। श्रेष्‍ठता के लिए ग्रहों में विवाद एक पौराणिक कथाओं के अनुसार बताते हैं कि एक बार सभी नवग्रहों सूर्य, चंद्र, मंगल, बुद्ध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु में विवाद छिड़ गया, कि इनमें सबसे बड़ा कौन है। सभी का दावा था कि वही सर्वोत्‍तम हैं। जब वे आपस में निर्णय नहीं कर सके तो देवराज इंद्र के दरबार में उनसे इस पर फैसला देने के लिए कहा। इंद्र इस स्‍थिति से डर गए और उन्‍होंने कहा कि वे इस पर फैसला लेने में सक्षम नहीं है। साथ ही उन्‍होंने उस समय पृथ्‍वी पर राज कर रहे राजा विक्रमादित्‍य की योग्‍यता और न्‍यायप्रियता का जिक्र करते हुए उनकी सलाह लेने के लिए कहा। इस पर सभी ग्रह राजा विक्रमादित्य के पास पहुंचे, और उन्‍हें अपना विवाद बताते हुए निर्णय के लिये कहा। ग्रहों की बात सुन कर राजा काफी चिंतित हो उठे, क्योंकि वे जानते थे, कि जिस किसी को भी छोटा बताया, वही रुष्‍ट हो जायेगा। अब राजा ने युक्‍ति निकाली, उन्हों...
गर्मियों में डैंड्रफ से बचने के लिए अपनाएं खास टिप्स ड्राई रूसी से बचाव के लिए बालों में आंवले का तेल लगा कर उसे दो घंटे के लिए छोड़ दें। रूसी की समस्या होना आम है। इससे न सिर्फ बालों की खूबसूरती कम होती है बल्कि खुजली व रूखेपन के साथ बालों का झडऩा भी शुरू हो जाता है। इस मौसम में बालों में ड्राईनेस आ जाती है, जिससे रूसी, बालों का गिरना और दो मुंहे बालों का होना जैसी दिक्कतें हो जाती हैं। आइए, जानते हैंं  कुछ टिप्स  सामान्य रूसी :  इसका मतलब है आमतौर पर होने वाला डैंड्रफ, जो हर किसी को होता है। गर्मी हो या सर्दी, ऑयली डैंड्रफ वाले लोगों के स्कैल्प पर पसीना रहता ही है। इससे सिर की त्वचा से भी तेल निकलता है और ऑयली डैंड्रफ जैसी समस्या हो जाती है। इस समस्या से बचने के लिए बालों को एक दिन छोड़ कर धोना ज़रूरी है। इसके अलावा बालों में सप्ताह में एक बार नींबू के रस को सरसों के तेल में मिलाकर लगाएं। अगर बालों पर केमिकल ट्रीटमेंट लिया है तो पोनी के बालों को छोड़कर केवल स्कैल्प पर अरोमा ऑयल से मसाज करें। इन उपायों के ज़रिये डैंड्रफ से बचाव संभव है। –– ADVERTI...
गर्मियों की स्पेशल डिश कच्चे केले के दही-भल्ले . कितने लोगों के लिए :  2 सामग्री : कच्चे केले- 4-5 ताज़ा दही- 300 ग्राम लाल मिर्च पाउडर- 1/2 छोटा चम्मच, 1/4 छोटा चम्मच जीरा पाउडर- 1/2 छोटा चम्मच हरी मिर्च- 1-2 कटी हुई विधि : केले को कुकर में डाल के एक सीटी दे कर उबाल लें। ठंडा होने के बाद उसे छील कर मसल लें। इस मसले हुए केले में हरी मिर्च, अदरक, नमक, जीरा पाउडर, लालमिर्च पाउडर मिला के आटे की तरह गूंध लें। इस मिश्रण से बराबर साइज के 10 से 12 बड़े बना लें। अब कढाई में तेल गरम करें और इन बड़ों को हलका ब्राउन होने तक तल लें। दही को एक बड़े बोल में निकालें, इसमें चीनी और नमक डाल के अच्‍छी तरह मिला लें। अब सर्विंग प्लेट में पहले थोड़ा सा दही डाले फिर उसके ऊपर 2 या 3 केले के रखें फिर ऊपर से और दही डालें। ऐसे जितने लोगों को देना है उतनी प्‍लेट लगा लें।इसके बाद इन प्‍लेटों के ऊपर से भुना जीरा पाउडर, लालमिर्च पाउडर, चाट मसाला और हरा धनिया डाल कर सर्व करें। By  Pratima Jaiswal
जानें कामाख्‍या देवी की अद्भुत विशेषता गुवाहटी में स्‍थित देवी का एक प्रमुख सिद्धपीठ है कामाख्‍या। यह शेष शक्‍ति पीठों से कुछ बातों में भिन्‍न है। तांत्रिकों का प्रिय मंदिर शुक्रवार को देवी के किसी शक्‍ित पीठ के दर्शन करना शुभ माना जाता है। देवी मां के कुल 51 शक्‍ितपीठ है, और सब की अलग-अलग महिमा है। ऐसा ही एक शक्‍तिपीठ है कामाख्‍या देवी का मंदिर। यह मंदिर असम राज्‍य के गुवाहाटी में एक पहाड़ी पर बना है। इस मंदिर को देवी के अन्‍य शक्‍ितपीठों से अलग माना जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है यहां उमड़ने वाला तांत्रिकों का हुजूम, क्‍योंकि ये मंदिर तंत्र साधना के लिए भी अत्‍यंत प्रसिद्ध है और आज भी यहां पशु बलि की परंपरा कायम है।  मां के इन अंगों के चलते बना शक्‍तिपीठ  जैसा की सब जानते हैं कि पौराणिक कथा में बताया गया है कि माता सती के पिता राजा दक्ष ने एक यज्ञ किया। इस यज्ञ में देवी सती के पति भगवान शिव को नहीं बुलाया गया। यह बात सती को बुरी लग गई और यज्ञ में आने पर वह अपने पति शिव का अपमान सह नहीं सकीं। इसके चलते क्रोधित होकर अग्‍निकुंड में कूदकर उन्‍होंने आत्‍मदाह कर...